Fertility Is a Shared Journey (Hindi Version)
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जब किसी दंपत्ति को गर्भधारण करने में कठिनाई होती है, तो अक्सर समाज में सबसे पहले महिला को जिम्मेदार ठहराया जाता है। लेकिन आधुनिक चिकित्सा विज्ञान यह स्पष्ट रूप से बताता है कि बांझपन (Infertility) केवल महिला की समस्या नहीं है, बल्कि यह पति-पत्नी दोनों से जुड़ा विषय है।
सफल गर्भधारण के लिए पुरुष और महिला दोनों की प्रजनन क्षमता (Fertility) का स्वस्थ होना आवश्यक है। इसलिए यदि गर्भधारण में देरी हो रही है, तो केवल महिला ही नहीं बल्कि पुरुष की भी जांच उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
शुभम केयर हॉस्पिटल, जयपुर में डॉ. शैलेश जैन (MBBS, DGO, DNB, 3D Laparoscopic Surgeon) के मार्गदर्शन में दंपत्तियों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक फर्टिलिटी मूल्यांकन और उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हैं।
फर्टिलिटी का अर्थ है किसी दंपत्ति की प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने की क्षमता।
एक सफल गर्भधारण के लिए निम्नलिखित चीजों का सामान्य होना आवश्यक है:
नियमित ओव्यूलेशन (अंडोत्सर्जन)
स्वस्थ अंडाशय (Ovaries)
खुली हुई फैलोपियन ट्यूब्स
स्वस्थ गर्भाशय
संतुलित हार्मोन
पर्याप्त शुक्राणु संख्या (Sperm Count)
शुक्राणुओं की अच्छी गति (Motility)
सामान्य शुक्राणु संरचना (Morphology)
स्वस्थ हार्मोन स्तर
सामान्य प्रजनन क्षमता
इनमें से किसी भी कारक में समस्या होने पर गर्भधारण में कठिनाई आ सकती है।
यदि एक वर्ष तक नियमित और असुरक्षित यौन संबंध बनाने के बावजूद गर्भधारण नहीं हो रहा है, तो फर्टिलिटी विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
यदि 6 महीने तक प्रयास करने के बाद भी गर्भधारण नहीं हो रहा है, तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
फर्टिलिटी की जांच केवल महिला तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
जब दोनों पार्टनर एक साथ डॉक्टर से मिलते हैं, तो:
समस्या का सही कारण जल्दी पता चलता है।
अनावश्यक जांचों से बचा जा सकता है।
समय और खर्च दोनों की बचत होती है।
उपचार की सफलता की संभावना बढ़ जाती है।
पुरुष और महिला दोनों से जुड़े कारणों का मूल्यांकन एक साथ हो जाता है।
इसीलिए शुभम केयर हॉस्पिटल में फर्टिलिटी मूल्यांकन हमेशा दंपत्ति को ध्यान में रखकर किया जाता है।
पीसीओएस महिलाओं में बांझपन का सबसे आम कारणों में से एक है।
इसके लक्षण हैं:
अनियमित मासिक धर्म
वजन बढ़ना
चेहरे पर अधिक बाल
मुंहासे
ओव्यूलेशन में समस्या
इस स्थिति में गर्भाशय की परत जैसी कोशिकाएं गर्भाशय के बाहर विकसित होने लगती हैं।
इसके कारण:
अत्यधिक दर्दयुक्त माहवारी
पेल्विक दर्द
गर्भधारण में कठिनाई
यदि ट्यूब बंद हो जाए तो अंडाणु और शुक्राणु का मिलन नहीं हो पाता।
ये गर्भाशय की ऐसी समस्याएं हैं जो गर्भधारण और भ्रूण के प्रत्यारोपण को प्रभावित कर सकती हैं।
थायरॉइड की समस्या
प्रोलैक्टिन बढ़ना
ओवरी की कार्यक्षमता में कमी
इन कारणों से भी गर्भधारण प्रभावित हो सकता है।
बहुत से लोगों को यह जानकर आश्चर्य होता है कि लगभग आधे मामलों में समस्या पुरुष पक्ष से भी हो सकती है।
कम स्पर्म काउंट गर्भधारण की संभावना को कम कर देता है।
यदि शुक्राणु सही तरीके से आगे नहीं बढ़ पाते तो वे अंडाणु तक नहीं पहुंच पाते।
असामान्य आकार वाले शुक्राणु निषेचन में बाधा उत्पन्न कर सकते हैं।
अंडकोष के आसपास की नसों का बढ़ जाना शुक्राणुओं की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।
धूम्रपान
शराब का सेवन
मोटापा
तनाव
अपर्याप्त नींद
प्रदूषण और रसायनों का प्रभाव
फर्टिलिटी मूल्यांकन में निम्न जांचें शामिल हो सकती हैं:
AMH
FSH
LH
थायरॉइड प्रोफाइल
प्रोलैक्टिन
ओवेरियन रिजर्व
फॉलिकल मॉनिटरिंग
गर्भाशय का मूल्यांकन
HSG
SSG
आवश्यकता अनुसार लैप्रोस्कोपी
यह पुरुषों की सबसे महत्वपूर्ण प्रारंभिक जांच है।
इसमें देखा जाता है:
स्पर्म काउंट
स्पर्म मोटिलिटी
स्पर्म मॉर्फोलॉजी
सीमेन की गुणवत्ता
समस्या के कारण के अनुसार उपचार किया जाता है।
स्वस्थ आहार
नियमित व्यायाम
वजन नियंत्रण
तनाव प्रबंधन
कई मामलों में फर्टिलिटी को बेहतर बना सकते हैं।
अनियमित ओव्यूलेशन वाली महिलाओं में दवाओं द्वारा अंडोत्सर्जन करवाया जाता है।
इस प्रक्रिया में तैयार किए गए शुक्राणुओं को सीधे गर्भाशय में डाला जाता है।
एंडोमेट्रियोसिस, फाइब्रॉइड्स, एडेनोमायोसिस और अन्य जटिल समस्याओं के लिए उन्नत लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।
डॉ. शैलेश जैन द्वारा 3D लैप्रोस्कोपिक तकनीक से ऐसी जटिल समस्याओं का उपचार किया जाता है जिससे महिलाओं की प्रजनन क्षमता को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।
कुछ दंपत्तियों को आईवीएफ या अन्य सहायक प्रजनन तकनीकों की आवश्यकता हो सकती है।
बांझपन का प्रभाव केवल शरीर पर नहीं पड़ता, बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।
कई दंपत्ति अनुभव करते हैं:
तनाव
चिंता
अवसाद
सामाजिक दबाव
रिश्तों में तनाव
इसलिए सही चिकित्सा के साथ भावनात्मक सहयोग भी बहुत महत्वपूर्ण है।
शुभम केयर हॉस्पिटल, जयपुर में हम दंपत्तियों को संपूर्ण फर्टिलिटी मूल्यांकन और उपचार प्रदान करते हैं।
हमारी विशेष सेवाएं:
कपल फर्टिलिटी काउंसलिंग
महिला बांझपन उपचार
पुरुष बांझपन मूल्यांकन
पीसीओएस प्रबंधन
एंडोमेट्रियोसिस उपचार
एडवांस्ड 3D लैप्रोस्कोपिक सर्जरी
गर्भधारण योजना परामर्श
डॉ. शैलेश जैन
MBBS, DGO, DNB
3D Laparoscopic Surgeon
बांझपन न तो केवल महिला की समस्या है और न ही केवल पुरुष की। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें पति और पत्नी दोनों की भूमिका होती है। इसलिए यदि गर्भधारण में कठिनाई हो रही है, तो दोनों पार्टनर्स को एक साथ विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
याद रखें—
Together We Evaluate. Together We Treat. Together We Achieve Parenthood.