Fits During Pregnancy : It could be Risky

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Fits During Pregnancy : It could be Risky

  13 July 2026
Fits During Pregnancy : It could be Risky

गर्भावस्था में फिट्स या दौरा आना: मां और शिशु के लिए कितना खतरनाक हो सकता है?

परिचय : गर्भावस्था के दौरान फिट्स या दौरा आना एक गंभीर स्थिति हो सकती है। यह केवल मां के लिए ही नहीं, बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी जोखिम पैदा कर सकता है। कई बार यह समस्या एक्लेम्पसिया (Eclampsia) के कारण होती है, जो गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप से जुड़ी एक गंभीर जटिलता है। इसलिए यदि गर्भवती महिला को दौरा आए, तो इसे सामान्य बात समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

फिट्स या दौरा क्या होता है?

फिट्स या दौरा तब होता है जब मस्तिष्क में अचानक असामान्य विद्युत गतिविधि शुरू हो जाती है। इसके कारण व्यक्ति बेहोश हो सकता है, शरीर में झटके आ सकते हैं, शरीर अकड़ सकता है या दौरे के बाद कुछ समय तक भ्रम की स्थिति रह सकती है। गर्भावस्था में दौरा आना हमेशा चिकित्सकीय जांच की मांग करता है।

गर्भावस्था में दौरा आने के मुख्य कारण

गर्भावस्था में दौरे का सबसे महत्वपूर्ण कारण एक्लेम्पसिया है। यह आमतौर पर प्री-एक्लेम्पसिया से विकसित होता है, जिसमें गर्भवती महिला का रक्तचाप बढ़ जाता है और शरीर के कुछ अंग प्रभावित होने लगते हैं। इसके अलावा यदि महिला को पहले से मिर्गी (Epilepsy) है, तो गर्भावस्था में भी दौरे आ सकते हैं। कभी-कभी लो ब्लड शुगर, डिहाइड्रेशन, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन या संक्रमण भी दौरे का कारण बन सकते हैं।

यह स्थिति कितनी हाई रिस्क मानी जाती है?

गर्भावस्था में फिट्स आना हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की श्रेणी में माना जाता है। यदि दौरा एक्लेम्पसिया के कारण हो, तो यह मां और शिशु दोनों के लिए जानलेवा स्थिति बन सकती है। इसलिए ऐसे मामलों में तुरंत अस्पताल में भर्ती कराकर विशेषज्ञ डॉक्टर की निगरानी में इलाज करना आवश्यक होता है।

मां के लिए संभावित खतरे

दौरे के दौरान मां को गिरने से चोट लग सकती है। इसके अलावा सांस लेने में कठिनाई, ऑक्सीजन की कमी, स्ट्रोक, लीवर या किडनी को नुकसान, अत्यधिक रक्तस्राव और प्रसव के दौरान जटिलताएं होने का खतरा बढ़ सकता है। गंभीर मामलों में मां के जीवन को भी खतरा हो सकता है।

शिशु के लिए संभावित खतरे

मां को दौरा आने पर गर्भ में पल रहे शिशु तक ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे फीटल डिस्ट्रेस, समय से पहले प्रसव, कम जन्म वजन या गंभीर मामलों में शिशु के जीवन को खतरा हो सकता है। इसलिए गर्भावस्था में दौरे को हमेशा गंभीरता से लेना चाहिए।

किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

यदि गर्भवती महिला को दौरा आए, तेज सिरदर्द हो, आंखों के सामने धुंधला दिखाई दे, चेहरे या हाथ-पैरों में अचानक सूजन आए, रक्तचाप बढ़ा हुआ हो, ऊपरी पेट में तेज दर्द हो या शिशु की हलचल कम महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर या अस्पताल से संपर्क करना चाहिए। ये लक्षण प्री-एक्लेम्पसिया या एक्लेम्पसिया के संकेत हो सकते हैं।

दौरे के समय क्या करें?

यदि गर्भवती महिला को दौरा आए, तो घबराने के बजाय तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता बुलानी चाहिए। महिला को करवट लिटाएं ताकि सांस लेने का रास्ता खुला रहे। आसपास की ऐसी वस्तुएं हटा दें जिनसे चोट लग सकती हो। उसके मुंह में कुछ भी न डालें और दौरे के दौरान उसे पकड़कर रोकने की कोशिश न करें। दौरा समाप्त होने के बाद भी उसे तुरंत अस्पताल ले जाना आवश्यक है।

उपचार कैसे किया जाता है?

उपचार दौरे के कारण पर निर्भर करता है। यदि कारण एक्लेम्पसिया है, तो डॉक्टर मैग्नीशियम सल्फेट जैसी दवाओं से दौरे को नियंत्रित करते हैं और रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए दवाएं देते हैं। यदि महिला को मिर्गी है, तो एंटी-सीज़र दवाओं की मात्रा डॉक्टर की सलाह से समायोजित की जा सकती है। गंभीर मामलों में मां और शिशु की सुरक्षा के लिए समय से पहले प्रसव कराना आवश्यक हो सकता है।

जोखिम को कैसे कम करें?

गर्भावस्था के दौरान नियमित एंटीनैटल चेकअप करवाना बहुत महत्वपूर्ण है। रक्तचाप की नियमित जांच करानी चाहिए और सिरदर्द, धुंधली दृष्टि, सूजन या शिशु की हलचल में कमी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं नियमित रूप से लेना, संतुलित आहार लेना, पर्याप्त पानी पीना और फॉलो-अप विजिट समय पर करना भी जोखिम कम करने में मदद करता है।

इसे बहुत उच्च जोखिम (Very High Risk) कब माना जाता है?

गर्भावस्था में फिट्स या दौरा आना अपने आप में एक उच्च जोखिम वाली स्थिति माना जाता है। लेकिन यह स्थिति बहुत अधिक जोखिम (Very High Risk) तब मानी जाती है जब दौरा एक्लेम्पसिया (Eclampsia) के कारण हो या इसके साथ गंभीर उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) मौजूद हो। ऐसी स्थिति में मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के जीवन को खतरा हो सकता है।

यदि गर्भवती महिला को दौरे के साथ तेज सिरदर्द, धुंधला दिखाई देना, चेहरे या हाथ-पैरों में अचानक सूजन, ऊपरी पेट में तेज दर्द, पेशाब में प्रोटीन आना या रक्तचाप बहुत अधिक होना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे बहुत उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था माना जाता है। इन लक्षणों के साथ दौरा आना एक्लेम्पसिया का संकेत हो सकता है, जो तुरंत अस्पताल में इलाज की मांग करता है।

ऐसी स्थिति में मां को स्ट्रोक, सांस लेने में कठिनाई, किडनी या लीवर को नुकसान, अत्यधिक रक्तस्राव या प्रसव संबंधी जटिलताएं होने का खतरा बढ़ सकता है। शिशु के लिए भी ऑक्सीजन की कमी, फीटल डिस्ट्रेस, समय से पहले प्रसव या कम जन्म वजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

इसलिए गर्भावस्था में किसी भी प्रकार का नया दौरा आने पर उसे मेडिकल इमरजेंसी माना जाना चाहिए। समय पर जांच, विशेषज्ञ डॉक्टर की निगरानी और उचित उपचार से मां और शिशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

निष्कर्ष

गर्भावस्था में फिट्स या दौरा आना मां और शिशु दोनों के लिए गंभीर खतरा हो सकता है। यह विशेष रूप से तब अधिक खतरनाक होता है जब इसका कारण उच्च रक्तचाप या एक्लेम्पसिया हो। इसलिए गर्भावस्था में दौरे को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर पहचान, तुरंत अस्पताल पहुंचना और उचित उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।